लुधियाना : पंजाब पुलिस के कई किस्से आपने सुने होंगे । एक नया किस्सा लुधियाना में सामने आया है। अपने की कांस्टेबल की गुमशुदगी का केस दर्ज करने में पुलिस को नौ साल लग गए। गुमशुदगी का मामला दर्ज कर उसे तलाश करने के बजाय विभाग उसके खिलाफ विभागीय जांच करते हुए उसे बर्खास्त करने में लगा रहा। पति के लापता होने के नौ साल तक उसकी पत्नी सीमा थानों और अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटती रही।
सीमा ने पुलिस को बताया कि रंजीत सिंह पंजाब पुलिस में कांस्टेबल थे। उनकी तैनाती पुलिस लाइन में पीसीआर में थी। वह लोग लुधियाना के ऋषि नगर इलाके में परिवार के साथ रहते थे। उनके दो बेटे और एक बेटी है। 16 अगस्त 2012 को रंजीत घर से ड्यूटी के लिए गए थे। देर शाम तक वह घर नहीं लौटे। उन्होंने पति को ढूंढने के लिए पुलिस के पास शिकायत भी की। कई बार थानों व सीनियर अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर लगाए। थाने वाले हर बार उसे आश्वासन देकर वापस भेज देते थे। पति के लापता होने के बाद उन्हें बच्चों के पालन-पोषण में परेशानी आने लगी। वह लोग जम्मू शिफ्ट हो गए। वहां से भी कई बार पुलिस अधिकारियों से पति के बारे में पूछती रही।
मिली जानकारी के मुताबिक पुलिस कमिश्नर को पूरे मामले की जानकारी देने के बाद थाना पीएयू में 18 जनवरी 2020 को गुमशुदगी की डीडीआर दर्ज की थी। कुछ दिन बाद पेंशन लगवाने के लिए मदद की गुहार लगाई। इसी बीच विभाग से आए कुछ मुलाजिमों ने बताया कि रंजीत सिंह को ड्यूटी से गैरहाजिर सात साल हो चुके हैं। इस कारण उसे बर्खास्त करने का फैसला लिया गया है। इतने साल एफआइआर तक तो दर्ज नहीं की लेकिन पति को बर्खास्त कर दिया। उन्होंने पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी। कोर्ट ने पुलिस को एफआइआर दर्ज करने के आदेश जारी किए। इसके बाद थाना पीएयू की पुलिस ने शुक्रवार को अपने गुमशुदा मुलाजिम की एफआइआर दर्ज की।