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After the applications of the candidates for the municipal elections, the survey will be conducted by "Aam Aadmi Party", the candidate will be decided by public opinion.

नगर निगम चुनाव के लिए प्रत्याशियों के आवेदन आने के बाद “आम आदमी पार्टी” द्वारा करवाया जाएगा सर्वे, जनता की राय से तय होगा उम्मीदवार

कमेटियों में स्थान पाने वालों के लिए भी रखी गई शर्त, पदाधिकारी बनने के बाद पार्षद की टिकट के लिए नहीं करेंगे आवेदन, सिर्फ और सिर्फ संगठन के लिए करेंगे काम

चंडीगढ़ (ब्यूरो रिपोर्ट): पंजाब नगर निगम चुनाव में आम आदमी पार्टी प्रत्याशियों को टिकट देने के लिए वही फॉर्मूला अपनाने जा रही है , जो उसने विधानसभा चुनाव के दौरान अपनाया था । पार्टी टिकट के लिए इच्छुक लोगों में से पिक एंड चूज की पॉलिसी नहीं अपनाएगी , बल्कि जनता की राय से कैंडिडेट तय करेगी, जिसके लिए आम आदमी पार्टी द्वारा सर्वे करवाया जाएगा और उसी के आधार पर टिकटें दी जाएंगी।

सूत्रों के अनुसार आम आदमी पार्टी नगर निगम चुनाव से पहले जमीनी स्तर पर अपना संगठनात्मक ढांचा खड़ा करने में जुटी हुई है । सभी इकाइयों का गठन हो जाने के बाद पार्टी नगर निगम चुनाव में उतरने के इच्छुक लोगों से आवेदन आमंत्रित करेगी । इसके लिए पार्टी निचले स्तर पर एक कमेटी की गठन करने जा रही है , जो आवेदन लेगी । यह कमेटी आवेदन लेने के बाद पहले अपने स्तर इनके बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर आगे भेजेगी ।

आला कमान के पास जब सारे आवेदन पहुंच जाएंगे तो फिर पार्टी अपने स्तर पर सभी उम्मीदवारों का सर्वे करवाएगी । सर्वे में जिस पर जनता की जो राय बन रही होगी । जिसे ज्यादा समर्थन मिलेगा , उसे पार्टी अपने बैनर तले चुनाव में उतारेगी । इसके लिए भी पार्टी ने अपने विधायकों और पदाधिकारियों को एक प्लान जारी किया है , जिस पर विधायकों ने वर्किंग शुरू भी कर दी है । लेकिन टिकटों से आवंटन से पहले पार्टी अपना कैडर बनाने की जुगत में है। इसके लिए वर्तमान में उसका फोकस संगठन के गठन और उसे मजबूत बनाने पर है । सभी विधायक पार्टी से आदेश मिलते ही निचले स्तर पर कमेटियों का गठन करने में जुट गए हैं । कमेटियों में स्थान पाने वालों के लिए भी शर्त रखी गई है कि वह पदाधिकारी बनने के बाद पार्षद की टिकट के लिए आवेदन नहीं करेंगे । वह सिर्फ और सिर्फ संगठन के लिए काम करेंगे ।

आम आदमी पार्टी के सत्ता में आने के बाद अब पार्टी के लिए विधानसभा चुनाव में काम करने वाले कार्यकर्ताओं की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं , जिन्होंने शहरी क्षेत्रों में पार्टी को सत्ता में लाने के लिए काम किया । अब वह भी चाहते हैं कि कम से कम शहरों की सरदारी तो उन्हें मिले । कुछ लोग आस लगा रहे हैं कि विधायक उन्हें टिकट दिलाने में अपनी भूमिका निभाएंगे , लेकिन विधायकों के सामने भी संकट खड़ा हो गया है कि वह किसका समर्थन करें और किसका नहीं । ऐसी स्थिति से निपटने के लिए पार्टी ने सर्वे वाले फॉर्मूले का सहारा लिया है । पार्टी ने साथ में यह भी कहा है कि जिन इच्छुक लोगों को टिकट नहीं मिल पाएगा , वह पार्टी का काम करेंगे । जिस कैंडिडेट को टिकट मिलेगा , उसकी जीत सुनिश्चित करने में मदद करेंगे ।

 


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