Latest news
स्वतंत्रता दिवस से पहले DGP गौरव यादव ने जिला पुलिस प्रमुखों को पेट्रोलिंग और निगरानी बढ़ाने का दिया... विजिलेंस ने 15 हजार रुपये रिश्वत लेते पटवारी को रंगे हाथ किया गिरफ्तार गोराया में पुल से नीचे गिरी क्रेटा कार, दो लोग घायल जालंधर में SIR प्रक्रिया के पहले चरण का डेटा जारी जालंधर के CP सतिंदर सिंह ने अधिकारियों के साथ की विशेष बैठक और जारी किए सख्त आदेश VIRAL NEWS : 220 करोड़ रुपये खर्च कर कई सर्जरी कराकर युवक बना कुत्ता ? वायरल VIDEO की सच्चाई आई सामन... पंजाब के लुधियाना की बेटी की कनाडा में सड़क हादसे में माैत, कैदी को ले जा रही थीं रमनदीप जालंधर में दर्दनाक हादसा : तेज़ रफ़्तार स्विफ्ट कार कैंटर से भिड़ी, तीन युवकों की मौत अमृतसर के CP गुरप्रीत भुल्लर का तबादला, जानें किस अधिकारी को मिली जिम्मेदारी तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय की पत्नी ने वापस लिया तलाक केस

India Living News

Hot News
You are currently viewing पहलगाम हमले में बाल-बाल बचे प्रोफेसर का दर्दनाक बयान, ‘कलमा पढ़कर बचाई जान’

पहलगाम हमले में बाल-बाल बचे प्रोफेसर का दर्दनाक बयान, ‘कलमा पढ़कर बचाई जान’

नेशनल न्यूज़ :: कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के दौरान असम के एक प्रोफेसर देबाशीष भट्टाचार्य अपनी जान बचाने में कामयाब रहे। घटना के बाद उन्होंने बताया कि किस तरह उन्होंने मौत को अपनी आंखों के ठीक सामने देखा और कैसे एक छोटी-सी बात ने उनकी जान बचा ली।

दरअसल पहलगाम के पास बैसरन में आतंकियों ने हमला किया। इस हमले में 26 पर्यटकों समेत कुल 28 लोग मारे गए। प्रोफेसर भट्टाचार्य भी अपने परिवार के साथ वहीं थे। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने कलमा पढ़ा तो उनकी जान बच गई।

धर्म पूछ-पूछकर गोली मारने लगे
देबाशीष भट्टाचार्य असम यूनिवर्सिटी में बंगाली विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर हैं। वे छुट्टियां मनाने अपने परिवार पत्नी और बच्चों के साथ पहलगाम की बेसरन घाटी गए थे। वहीं पर आतंकी हमला हुआ।प्रोफेसर ने बताया कि अचानक कुछ आतंकी घाटी में घुस आए और वहां मौजूद लोगों से उनका धर्म पूछ-पूछकर गोली मारने लगे। उस समय वे और उनका परिवार एक पेड़ के नीचे आराम कर रहे थे। उन्होंने देखा कि आस-पास के लोग आतंकियों से बचने के लिए कलमा पढ़ रहे हैं।

कलमा पढ़ना शुरू किया, आतंकी चला गया
उन्हें यह आते था, तो उन्होंने भी वही किया। तभी एक आतंकी उनके पास आया और कुछ पूछने की कोशिश की, लेकिन प्रोफेसर ने जवाब देने के बजाय और तेज़ी से कलमा पढ़ना शुरू कर दिया। यह देखकर आतंकी वहां से दूसरी तरफ चला गया। लेकिन जाते-जाते उसने प्रोफेसर के ठीक बगल में लेटे एक व्यक्ति के सिर में गोली मार दी।

यह खौफनाक मंझर देखकर प्रोफेसर और उनका परिवार सहम गया। जैसे-तैसे उन्होंने चुपचाप वहां से निकलने का फैसला किया और करीब दो घंटे तक पैदल चलकर अपने होटल पहुंचे। हमले के 24 घंटे बाद भी प्रोफेसर सदमे में हैं। उन्होंने कहा, “अब भी यकीन नहीं हो रहा कि मैं ज़िंदा हूं।


Leave a Reply