नेशनल न्यूज़ :: कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के दौरान असम के एक प्रोफेसर देबाशीष भट्टाचार्य अपनी जान बचाने में कामयाब रहे। घटना के बाद उन्होंने बताया कि किस तरह उन्होंने मौत को अपनी आंखों के ठीक सामने देखा और कैसे एक छोटी-सी बात ने उनकी जान बचा ली।
दरअसल पहलगाम के पास बैसरन में आतंकियों ने हमला किया। इस हमले में 26 पर्यटकों समेत कुल 28 लोग मारे गए। प्रोफेसर भट्टाचार्य भी अपने परिवार के साथ वहीं थे। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने कलमा पढ़ा तो उनकी जान बच गई।
धर्म पूछ-पूछकर गोली मारने लगे
देबाशीष भट्टाचार्य असम यूनिवर्सिटी में बंगाली विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर हैं। वे छुट्टियां मनाने अपने परिवार पत्नी और बच्चों के साथ पहलगाम की बेसरन घाटी गए थे। वहीं पर आतंकी हमला हुआ।प्रोफेसर ने बताया कि अचानक कुछ आतंकी घाटी में घुस आए और वहां मौजूद लोगों से उनका धर्म पूछ-पूछकर गोली मारने लगे। उस समय वे और उनका परिवार एक पेड़ के नीचे आराम कर रहे थे। उन्होंने देखा कि आस-पास के लोग आतंकियों से बचने के लिए कलमा पढ़ रहे हैं।
कलमा पढ़ना शुरू किया, आतंकी चला गया
उन्हें यह आते था, तो उन्होंने भी वही किया। तभी एक आतंकी उनके पास आया और कुछ पूछने की कोशिश की, लेकिन प्रोफेसर ने जवाब देने के बजाय और तेज़ी से कलमा पढ़ना शुरू कर दिया। यह देखकर आतंकी वहां से दूसरी तरफ चला गया। लेकिन जाते-जाते उसने प्रोफेसर के ठीक बगल में लेटे एक व्यक्ति के सिर में गोली मार दी।
यह खौफनाक मंझर देखकर प्रोफेसर और उनका परिवार सहम गया। जैसे-तैसे उन्होंने चुपचाप वहां से निकलने का फैसला किया और करीब दो घंटे तक पैदल चलकर अपने होटल पहुंचे। हमले के 24 घंटे बाद भी प्रोफेसर सदमे में हैं। उन्होंने कहा, “अब भी यकीन नहीं हो रहा कि मैं ज़िंदा हूं।











