हेल्थ : शरीर को स्वस्थ रखने के लिए हमें रोज़ 7-9 घंटे की नींद लेना आवश्यक है। यह आपको शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सोने के समय के साथ साथ इसके सही तरीके से सोने का भी ध्यान रखना चाहिए । आपने पहले भी सुना होगा कि सोने की अच्छी मुद्रा का ध्यान रखना बहुत महत्वपूर्ण है।
सोने की अलग-अलग स्थिति आपके कंधों, गर्दन और रीढ़ की हड्डी पर प्रभाव डालती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, गलत तरीके से सोने के कई दुष्प्रभाव हो सकते हैं। सोने के सही तरीके का मतलब उस मुद्रा से है जो आपके मांसपेशियों, तंत्रिकाओं को आराम देती है। इतना ही नहीं अध्ययनकर्ताओं ने यहां तक बताया कि अगर आप सही तरीके से सोते हैं तो यह स्लीप एपनिया और खर्राटे आने की समस्या को भी कम कर सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, सोने-बैठने के गलत तरीके के कारण पूरी सेहत पर कई प्रकार से नकारात्मक असर हो सकता है। खराब मुद्रा के कारण तनाव की समस्या से लेकर, मांसपेशियों में कमजोरी और लचीलापन, मोटापे की भी दिक्कत हो सकती है।
आइए जानते हैं कि किस तरीके से सोने का आपके शारीरिक स्थिति पर क्या असर हो सकता है?
करवट लेकर सोना
अधिकांश लोग करवट लेकर सोना पसंद करते हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि वयस्क अपना आधे से अधिक समय करवट लेकर सोने में बिताते हैं। ऐसा माना जाता है कि उम्र बढ़ने के साथ-साथ यह अधिक सामान्य हो जाता है क्योंकि आपकी रीढ़ की हड्डी में लचीलापन कम हो जाता है। करवट लेकर या अपने पैरों को मोड़कर सोने से आपके वायुमार्ग को खुला रखने में मदद मिलती है। इससे खर्राटों और हल्के स्लीप एपनिया को भी कम किया जा सकता है।
बाईं तरफ करवट लेकर सोएं
सामान्य लोगों को हमेशा बाईं तरफ करवट लेकर सोना चाहिए. बाईं करवट सोने से पाचन तंत्र दुरुस्त रहता है और गैस, एसिडिटी, स्लिप डिस्क, कमर दर्द, सर्वाइकल, गर्दन में दर्द, हाई बीपी, हृदय रोग जैसी तमाम परेशानियों से राहत मिलती है. हालांकि पूरी रात एक करवट में नहीं सोया जा सकता. ऐसे में पोजिशन बदलने के लिए आप कुछ देर के लिए पीठ के बल लेट सकते हैं. पोजिशन बदलते रहने से स्पाइनल, बैक, कंधे और गर्दन से जुड़ी समस्याओं से बचाव होता है. लेकिन पेट के बल सोना पूरी तरह से अवॉयड करें. इससे कमर के दर्द, नर्व रिलिटेड और स्पाइन रिलेटेड प्रॉब्लम्स होने का रिस्क रहता है.
पीठ के बल सोना
आपकी नींद की मुद्रा को बेहतर बनाने के लिए पीठ के बल सोना सबसे अच्छी स्थिति मानी जाती है। यह बेहतर संरेखण को बढ़ावा देने के साथ बाहों और पैरों पर दबाव कम करता है। गर्दन या पीठ दर्द से पीड़ित लोगों को विशेषकर पीठ के निचले हिस्से में दर्द की समस्या को कम करने के लिए पीठ के बल सोना सबसे लाभकारी माना जाता है।
Disclaimer : ये लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए लिखा गया है। इंडिया लिविंग न्यूज़ इस लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित जानकारी या बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।