पंजाब : जम्मू एवं कश्मीर और हिमाचल की सरहदों से सटे पंजाब के पठानकोट जिले को सरकार विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल बनाएगी। भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बसे इस शहर को मुख्य पर्यटन केंद्र बनाने के लिए सरकार ने रणजीतगढ़ डेवलपमेंट अथॉरिटी विधेयक-2026 के गठन की मंजूरी दे दी है।
पंजाब मंत्रिमंडल की बैठक में इस संदर्भ में प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इसके अलावा अन्य प्रस्तावों को भी स्वीकृति मिली है। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि इसका उद्देश्य रणजीत सागर बांध और शाहपुरकंडी बांध क्षेत्रों का सुनियोजित, टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल पर्यटन के अनुरूप विकास करना है।
मंत्री ने बताया कि आरडीए का गठन पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामलों के विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में एक वैधानिक निकाय के रूप में किया जाएगा। इसे एकीकृत विकास, भूमि प्रबंधन, परियोजनाओं के क्रियान्वयन और पर्यटन स्थलों के प्रबंधन के लिए आवश्यक प्रशासनिक, वित्तीय और नियामक अधिकार दिए जाएंगे।
वित्त मंत्री ने बताया कि प्राधिकरण के अध्यक्ष मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान होंगे जबकि पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामलों के मंत्री इसके उपाध्यक्ष होंगे। मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली कार्यकारी समिति प्राधिकरण के रोजमर्रा के कामकाज और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की निगरानी करेगी।
एडवेंचर टूरिज्म से मिलेगा विस्तार
रणजीत सागर-शाहपुरकंडी बांध क्षेत्र को जल पर्यटन, इको-टूरिज्म और एडवेंचर गतिविधियों के बड़े केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। रावी नदी, विशाल जलाशय, पहाड़ी भू-दृश्य और हरियाली पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण हैं। यहां बोटिंग, वाटर स्पोर्ट्स, कैंपिंग, नेचर ट्रेल और बर्ड वॉचिंग जैसी गतिविधियों की संभावनाएं हैं। कथलौर-कुशलियां वन्यजीव अभयारण्य को भी पर्यटन सर्किट से जोड़ा जा सकता है। शाहपुरकंडी किला, मुकेश्वर मंदिर और बारठ साहिब को जोड़कर धार्मिक-ऐतिहासिक सर्किट विकसित किया जा सकता है। पठानकोट की हिमाचल और जम्मू-कश्मीर से निकटता इस पर्यटन क्षेत्र के लिए बड़ा लाभ है।