Skip to content

वाहन खरीदने के बाद नया मालिक बिना RC ट्रांसफर किये गाडी चलाता है तो पुराने मालिक को झेलना पड़ सकता है बड़ा नुक्सान

After purchasing the vehicle, if the new owner drives the vehicle without transferring the RC, the old owner may have to suffer huge losses.
After purchasing the vehicle, if the new owner drives the vehicle without transferring the RC, the old owner may have to suffer huge losses.
Share Facebook X WhatsApp Telegram Email
View in ePaper
नई दिल्ली : अपने वाहन को अगर आप बेचते हैं लेकिन खरीदने वाले ने उसे अपने नाम पर ट्रांसफर न करवाया हो तो क्या होता है, पुराने मालिक को क्या नुकसान झेलना पड़ सकता है और इसके लिए क्या किया जा सकता है, आइए जानते हैं.. मूल मालिक को झेलने पड़ सकते हैं ये नुकसान बता दें कि अगर वाहन के नए मालिक ने उसे अपने नाम पर ट्रांसफर नहीं करवाया है और बिकने के बाद भी गाड़ी मूल मालिक के ही नाम पर है तो इसके कई नुकसान हो सकते हैं। एक वाहन से अगर कोई अपराध होते हैं, या किसी गलत काम के लिए गाड़ी चला रहे नए मालिक को पकड़ा जाता है तो कार्रवाई मूल मालिक के नाम पर होगी, आरोपी भी वही माना जाएगा क्योंकि वाहन उसी के नाम पर रजिस्टर्ड है। वाहन के बिकने के बाद ट्रांसफर का प्रावधान आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह अनिवार्य है कि एक वाहन बेचने के बाद मूल मालिक से नए मालिक के नाम पर वाहन का ट्रांसफर किया जाए। 'मोटर वाहन अधिनियम, 1988' (Motor Vehicles Act, 1988) की धारा 50 में यह स्पष्ट किया गया है कि जिस दिन पुराना वाहन बेचा गया है, उस दिन से अगले चौदह दिनों के भीतर, जिस शख्स ने वाहन को खरीदा है, उसे वाहन को अपने नाम पर ट्रांसफर करवा लेना चाहिए। अगर वाहन का खरीदना-बेचना अलग-अलग राज्यों में हुआ है तो वाहन को अपने नाम पर दर्ज करवाने के लिए नए मालिक को 45 दिनों का समय दिया जाता है। स्टैम्प पर अगर कोई लेखापढ़ी की जाती है तो उसकी वैधता सिर्फ 14 दिन की होती है क्योंकि इस समय के अंदर वाहन की ओनरशिप को ट्रांसफर कर लेना चाहिए। अगर वाहन से हुई कोई सड़क दुर्घटना तो.. बिकी वाहन से अगर कोई सड़क दुर्घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी भी गाड़ी के मालिक पर ही आएगी, जो कागजी तौर पर मूल मालिक होगा क्योंकि स्वामित्व का ट्रांसफर नहीं हुआ होगा। एक सड़क दुर्घटना में तो तरह के प्रकरण बनते हैं- आपराधिक और सिविल। आपराधिक प्रकरण में सजा जुर्माना और जेल, दोनों हो सकते हैं और कई ऐसी परिस्थितियां होती हैं जब मुकदमा वाहन के मालिक पर भी हो जाता है। नया मालिक नहीं कर रहा है ट्रांसफर तो क्या करना चाहिए? आपको बता दें कि अगर नया मालिक वाहन खरीदने के बाद निर्धारित समय में उसे अपने नाम पर ट्रांसफर नहीं करता है तो मूल मालिक का यह कर्तव्य है कि वो वाहन को ट्रांसफर करवाने के लिए नए मालिक को, रजिस्टर्ड डाक के जरिए एक सूचना पत्र भेजें और उसे जनद से जनद वाहन ट्रांसफर करने की चेतावनी दें। ट्रांसफर न किये जाने पर वाहन का कब्जा वापस मांगना चाहिए, क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय को एक आवेदन पत्र भेजना चाहिए और उनसे अनुरोध करना चाहिए कि वो रेजिस्ट्रेशन को निरस्त कर दें। बता दें कि इन सब तरीकों से काम न बने तो आप अदालत में जाकर एक नए मालिक के खिलाफ आपराधिक और सिविल मुकदमा भी दर्ज कर सकते हैं।