मानसा : आज पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की आत्मिक शांति के लिए मानसा में भोग समागम कराया गया। इस दौरान सिद्धू के पिता बलकौर सिंह और मां चरण कौर भावुक हो गए। उन्होंने अपना दर्द किया बयां , सुनने वालों के आंसूं छलक पड़े। पिता ने कहा कि मेरे बेटे ने किसी के साथ कुछ गलत नहीं किया। मुझे नहीं पता कि उसे क्यों मारा गया है।
इस दौरान पिता बलकौर सिंह ने अपने दिल की बातें सांझा की , उन्होंने बताया कि सिद्धू मूसेवाला का जीवन बड़ा साधारण था। उन्होंने कहा जब मूसेवाला नर्सरी में पढ़ता था तो गांव से बस तक नहीं जाती थी। साधन नहीं थे लेकिन फिर भी किसी न किसी तरह स्कूल भेजा। मैं फायर ब्रिगेड में था तो मूसेवाला को छोड़ने के चक्कर में एक बार ड्यूटी पर 20 मिनट लेट हो गया। इसके बाद मूसेवाला को कहा कि या तो तू पढ़ेगा या मैं नौकरी करूंगा। उन्होंने बताया मूसेवाला ने छोटी उम्र में ही 24 किलोमीटर तक स्कूल साइकिल से आना-जाना किया।
इसके अलावा बलकौर सिंह ने कहा कि संघर्षपूर्ण हालातों में भी मूसेवाला आगे बढ़ता रहा। उन्होंने बताया हालात ऐसे थे कि मैं कभी जेब खर्च तक पूरा नहीं दे सका। उसने अपनी मेहनत से बारहवीं की। ग्रेजुएशन करने के लिए लुधियाना के गुरुनानक इंजीनियरिंग कॉलेज चला गया। फिर IELTS कर बाहर चला गया। डिग्री के बाद भी मुझे कभी तंग नहीं किया।
बलकौर सिंह ने कहा कि मूसेवाला को जब भी कभी पैसों की जरूरत होती तो अपना गाना बेच देता था। यहां तक कि बुलंदियों तक पहुंचने के बाद भी अपने पास पर्स नहीं रखा। एक हजार रुपए की जरूरत होती तो मुझसे मांगता था। उन्होंने कहा जब भी सिद्धू घर से निकलता, हमेशा पैर छूकर और आज्ञा लेकर जाता था। गाड़ी की सीट पर बैठकर भी मां के गले लगकर जाता था।
पिता बलकौर सिंह ने बताया कि 29 मई घटना वाले दिन सिद्धू की मां गांव में किसी की मौत होने पर गई थी। मैंने मूसेवाला को कहा कि मैं साथ जाता हूं। तब मैं खेत से आया था। मूसेवाला ने कहा कि आपके कपड़े गंदे हैं। मैं 5 मिनट में जूस पीकर वापस आता हूं।
पिता बलकौर सिंह ने कहा कि मैं सारी जिंदगी मूसेवाला के साथ रहा। लेकिन आखिर में मैं पीछे रह गया। अब मेरे पास पछताने के सिवाय कुछ नहीं हुआ। उन्होंने कहा मुझे यह तक नहीं पता कि मेरे बच्चे का कसूर क्या है। मेरे पास कभी कोई फोन कॉल या उलाहना नहीं आया कि मेरे बच्चे ने कोई कसूर किया हो।
वहीँ इस दौरान मूसेवाला की मां चरण कौर ने कहा कि 29 मई को काला दिन चढ़ा और ऐसा लगा कि मेरा सब कुछ खत्म हो गया। लेकिन आप लोगों ने दुख में साथ दिया तो लगा कि मूसेवाला मेरे ही आसपास है। हमारे हौंसले को इसी तरह बनाकर रखना। पगड़ी और माता-पिता का सत्कार करना। उन्होंने कहा प्रदूषण काफी बढ़ चुका है। इसलिए हर व्यक्ति सिद्धू मूसेवाला के नाम पर एक-एक पेड़ लगाएं। उसे छोड़े नहीं बल्कि पालकर बड़ा करें।