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स्विस बैंकों में तीन गुना बढ़ा भारतीयों का पैसा, 2021 के बाद सबसे ज्यादा

वर्ल्ड न्यूज़ : स्विस बैंकों में भारतीय जमा राशि 2024 में तीन गुना से भी ज्यादा बढ़कर 3.5 बिलियन स्विस फ्रैंक (लगभग 37,600 करोड़ रुपये) हो गई है। इसका मुख्य कारण स्थानीय शाखाओं और अन्य वित्तीय संस्थानों के जरिए जमा धन में भारी वृद्धि है। स्विट्जरलैंड के केंद्रीय बैंक ने इस संबंध में अपने वार्षिक आंकड़े गुरुवार को जारी किए। हालांकि, भारतीय ग्राहकों के खातों में जमा धन 11 फीसदी बढ़कर 346 मिलियन स्विस फ्रैंक (करीब 3,675 करोड़ रुपये) हुआ, जो कुल जमा राशि का लगभग दसवां हिस्सा ही है।

इससे पहले, 2023 में भारतीय व्यक्तियों और फर्मों द्वारा स्विस बैंकों में जमा धन में 70 प्रतिशत की गिरावट की आई थी और यह चार साल के निचले स्तर 1.04 अरब स्विस फ्रैंक पर आ गया था। इसमें स्थानीय शाखाओं और अन्य वित्तीय संस्थानों के माध्यम से रखी जमा राशि शामिल है। बीते वर्ष की जमा राशि 2021 के बाद से सबसे अधिक है। उस समय स्विस बैंकों में भारतीयों की जमा राशि 14 साल के उच्चतम स्तर 3.83 अरब स्विस फ्रैंक पहुंच गई थी। ये स्विस नेशनल बैंक (एसएनबी) को बैंकों से मिले आधिकारिक आंकड़े हैं और स्विट्जरलैंड में भारतीयों द्वारा रखे गए बहुचर्चित कथित काले धन की मात्रा का संकेत नहीं देते हैं। इन आंकड़ों में वह राशि भी शामिल नहीं है जो भारतीयों, एनआरआई या अन्य लोगों ने तीसरे देश की संस्थाओं के नाम पर स्विस बैंकों में रखी हो सकती है।

2023 के अंत में कुल देनदारियां 354.5 करोड़ स्विस फ्रैंक
एसएनबी की ओर से 2023 के अंत में स्विस बैंकों की कुल देनदारियों या उनके भारतीय ग्राहकों को बकाया राशियों के रूप में 354.5 करोड़ स्विस फ्रैंक बताए गए हैं। इनमें ग्राहक जमा में 34.6 करोड़ स्विस फ्रैंक (2023 के अंत में 31.0 करोड़ स्विस फ्रैंक से अधिक), अन्य बैंकों के माध्यम से रखे गए 302 करोड़ स्विस फ्रैंक (42.7 करोड़ स्विस फ्रैंक से कम), न्यासों या ट्रस्टों के माध्यम से 4.1 करोड़ स्विस फ्रैंक (1 करोड़ स्विस फ्रैंक से अधिक) और बॉन्ड, प्रतिभूतियों और विभिन्न अन्य वित्तीय साधनों के रूप में ग्राहकों को देय अन्य राशियों के रूप में 13.5 करोड़ स्विस फ्रैंक (29.3 करोड़ स्विस फ्रैंक से कम) शामिल हैं। एसएनबी के अनुसार, भारतीय ग्राहकों के प्रति स्विस बैंकों की कुल देनदारियों के लिए इसके डाटा में स्विस बैंकों में भारतीय ग्राहकों के सभी प्रकार के फंड को शामिल किया गया है। इसमें व्यक्तियों, बैंकों और उद्यमों से जमा राशि भी शामिल है। इसमें भारत में स्विस बैंकों की शाखाओं के साथ-साथ गैर जमा देनदारियों का डाटा भी शामिल है।

2006 में रिकॉर्ड उच्चस्तर पर थी जमा राशि
एसएनबी के आंकड़ों के अनुसार, 2006 में कुल राशि करीब 6.5 अरब स्विस फ्रैंक के रिकॉर्ड उच्चस्तर पर थी। इसके बाद 2011, 2013, 2017, 2020 और 2021 सहित कुछ वर्षों को छोड़कर यह ज्यादातर नीचे की ओर ही रही है। दूसरी ओर, बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट (बीआईएस) के स्थानीय बैंकिंग सांख्यिकी ने 2024 के दौरान ऐसी निधियों में करीब 6 प्रतिशत की वृद्धि दिखाते हुए 74.8 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 650 करोड़ रुपये) की बढ़ोतरी की है। इसे अतीत में भारतीय और स्विस अधिकारियों की ओर से स्विस बैंकों में भारतीय व्यक्तियों द्वारा जमा के लिए अधिक विश्वसनीय उपाय के रूप में वर्णित किया गया है। हालांकि 2020 में लगभग 39 प्रतिशत की वृद्धि के बाद 2023 में इसमें 25 प्रतिशत, 2022 में 18 प्रतिशत तथा 2021 में 8 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई थी। यह आंकड़ा स्विस-निवासी बैंकों के भारतीय गैर-बैंक ग्राहकों के जमा के साथ-साथ ऋण को भी ध्यान में रखता है और 2018 में 11 प्रतिशत और 2017 में 44 प्रतिशत की गिरावट के बाद 2019 में 7 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। 2007 के अंत में यह 2.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर (9,000 करोड़ रुपये से अधिक) के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था।

स्विस बैंकों में विदेशी ग्राहकों की रखी राशि के मामले में ब्रिटेन 222 अरब स्विस फ्रैंक के साथ शीर्ष पर है। उसके बाद दूसरे स्थान पर अमेरिका (89 अरब स्विस फ्रैंक) और तीसरे स्थान पर वेस्टइंडीज (68 अरब स्विस फ्रैंक) है। इन तीनों के बाद शीर्ष 10 में जर्मनी, फ्रांस, हांगकांग, लक्जमबर्ग, सिंगापुर, ग्वेर्नसे और संयुक्त अरब अमीरात हैं। भारत इस मामले मं 48वें स्थान पर है जबकि 2023 में 67वें स्थान पर था। हालांकि, यह 2022 के अंत में 46वें स्थान से नीचे है। पाकिस्तान के निवासियों की जमा राशि भी घटी है और यह 28.6 करोड़ से घटकर 27.2 करोड़ स्विस फ्रैंक पर रही। वहीं बांग्लादेश के मामले में यह 1.8 करोड़ स्विस फ्रैंक से बढ़कर 58.9 करोड़ स्विस फ्रैंक हो गई।


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