Lifestyle : रात को सोते समय ज़्यादातार लोग अपने तकिये के नीचे या फिर पास में मोबाइल फोन रखकर सो जाते हैं। बात करे तो अब यह चीज़ लोगों की आदत में शुमार हो चकी है। कई लोग रात में फोन का इस्तेमाल करते हैं और फिर पास ही रखकर सो जाते हैं। वहीँ जब भी नींद खुलती है लोग तुरंत मोबाइल उठाकर देखने लगते हैं।वहीं, कुछ लोग अलार्म के कारण फोन को पास रखते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि मोबाइल फोन का असर स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। आज हम आपको बताते हैं कि अगर आप फोन पास में रखकर सोते हैं तो इससे क्या क्या नुकसान हो सकता है।
सिर के पास मोबाइल रखकर सोने के नुकसान
बिगड़ सकता है स्लीपिंग शेड्यूल: मोबाइल से निकलने वाली ब्लू लाइट मेलाटोनिन हार्मोन को प्रभावित करती है जो नींद को नियंत्रित करता है। इससे नींद न आना, नींद में बार-बार खलल और नींद की गुणवत्ता में गिरावट देखने को मिल सकती है।
सिरदर्द और माइग्रेन: मोबाइल की रेडिएशन से सिरदर्द और माइग्रेन की समस्या हो सकती है। खासकर तब जब आप मोबाइल को सिर के बहुत करीब रखकर सोते हैं।
कानों में चुभन: मोबाइल से निकलने वाली रेडिएशन आपके कानों को भी गंभीर रूप से प्रभावित करती है और इससे कानों में चुभन की समस्या पैदा हो सकती है।
त्वचा से जुड़ी समस्याएं: मोबाइल की स्क्रीन पर बैक्टीरिया बहुत जल्दी पनपते हैं। जब आप मोबाइल को चेहरे के पास रखकर सोते हैं तो ये बैक्टीरिया आपकी त्वचा पर पहुंचकर कील-मुंहासे जैसी समस्याएं पैदा कर सकते हैं।
कैंसर का खतरा: इस बारे में अभी तक कोई ठोस सबूत तो नहीं मिले हैं, लेकिन कुछ स्टडी से पता चलता है कि मोबाइल की रेडिएशन से कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है।
तनाव और चिंता: सोने से पहले मोबाइल का इस्तेमाल करने से तनाव और चिंता बढ़ सकती है। इससे स्लीपिंग शेड्यूल बुरी तरह बिगड़ जाता है।
दिल की बीमारियां: स्टडीज बताती हैं कि मोबाइल की रेडिएशन दिल की बीमारियों को भी न्योता दे सकती है। यही वजह है कि आपको यह आदत तुरंत छोड़ देनी चाहिए।
कितना दूर रखकर सोएं मोबाइल
मोबाइल फोन को अपने बिस्तर से कम से कम तीन फीट की दूरी पर रखकर खतरनाक रेडिएशन से बचा जा सकता है। सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल का इस्तेमाल बंद कर दें। मोबाइल को कभी भी तकिए के नीचे या सिर के पास रखकर न सोएं। नियमित रूप से अपने मोबाइल को साफ करते रहें।
Disclaimer : लेख में उल्लेखित सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी सवाल या परेशानी हो, तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।











