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इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई, जल्द जाएंगे जेल – संघेड़ा

पंजाब नेशनल बैंक पे पास गिरवी पड़ी ट्रस्ट की बड़ी संपत्तियों को छुड़वाया

लगभग 350 रजिस्ट्रियां और लगभग 100 एनडीसी अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किए

काजी मंडी के निवासियों को स्थानांतरित करने के लिए 2 मरले के 55 प्लॉट और डेढ़ मरले के 131 प्लॉट के आवंटन की प्रक्रिया अंतिम चरण में

जालंधर : आज जालंधर, इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रोफेसर जगतार सिंह संघेड़ा ने कहा कि 14 नवंबर 2022 को उनके अध्यक्ष के रूप में पदभार संभालने के बाद, ट्रस्ट की बड़ी संपत्तियों (गुरु गोबिंद सिंह स्टेडियम सहित) को छुड़ाया गया है जोकि 162 करोड़ रुपये की देनदारी के कारण , पंजाब नेशनल बैंक के पास गिरवी थे और कुर्की की प्रक्रिया चल रही थी। ट्रस्ट ने बैंक से बात करने और 50 करोड़ रुपये की छूट (सीटीएस) लेने के बाद बाकी 112 करोड़ का सॉफ्ट लोन लेकर अदायगी की और सेटलमेंट किया। पहले 7 महीनों में ट्रस्ट की आय 8.07 करोड़ रुपये के मुकाबले अब यह आय 16.37 करोड़ रुपये है, लेकिन रिफंड और ऋणभार के भुगतान जैसी वित्तीय समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं। माननीय मुख्यमंत्री भगवंत मान साहब के नेतृत्व और आदेशों के अनुसार पंजाब सरकार के ज़ीरों टोलरेंस पर चलते हुए ट्रस्ट में पिछले घोटालों, अनियमितताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है और विभिन्न चरणों में मामलों की जांच की जा रही है। उन्होने कहा कि आरोपी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी को चाहे वह छोटा हो या बड़ा, अपना हो या बेगाना, किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। उन्होने कहा कि पिछले समय दौरान कार्यालय से भ्रष्टाचार को खत्म किया गया है और लोगों के मामलों को प्राथमिकता के आधार पर बिना किसी देरी के निपटाया जा रहा है।

प्रो संघेड़ा ने कहा कि 30% कर्मचारियों के साथ, कुल लगभग 350 रजिस्ट्रियां और लगभग 100 एनडीसी अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए हैं जो काफी समय से लंबित थे। उन्होंने यह भी बताया कि इस अवधि में लम्बित 150 प्रस्तावित एवं 50 पूर्ण भवन मानचित्र स्वीकृत किये गये हैं और अब ये सभी कार्य अद्यतन हो गये हैं। 465 करोड़ रुपये की लागत से सूर्या एन्क्लेव में पेयजल नहरी जल योजना के तहत एक लीटर क्षमता की बनाई जा रही अंडर ग्राउंड पानी की टंकी व अन्य कार्यों का शीघ्र निस्तारण किया जा रहा है और लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। उनके द्वारा यह भी बताया गया कि सूर्या एन्क्लेव के जिन विक्षुब्ध आवंटियों के भूखण्डों की रजिस्ट्री 16 वर्षों से नहीं हुई थी, उनकी रजिस्ट्री मात्र 12 हजार रूपये के प्रथम शुल्क पर कर ली गयी तथा दोषी अधिकारियों/कर्मचारियों के विरूद्ध कार्यवाही प्रारम्भ कर दी गयी। महाराजा रणजीत सिंह एवेन्यू प्लॉट मालिक मकान नं. 292 जिन्हें 11 साल से प्लॉट पर कब्जा नहीं मिला, उनको कब्जा दिलाया गया। ऐसी और भी कई संपत्तियां हैं जिनका निस्तारण वर्षों से लंबित था, उनका निस्तारण किया गया है।

प्रो संघेड़ा ने यह भी बताया कि एन्क्लेव एक्सटेंशन में आने वाले काजी मंडी के निवासियों को स्थानांतरित करने के लिए 2 मरले के 55 प्लॉट और डेढ़ मरले के 131 प्लॉट के आवंटन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। लतीफपुरा मामले में, विस्थापित लोगों के पुनर्वास के लिए सरकार द्वारा 2 विकल्पों को मंजूरी दी गई है या तो उन्हें बीबी भानी कॉम्प्लेक्स में एक फ्लैट मिल सकता है या उन्हें सूर्या एन्क्लेव एक्सटेंशन में 2 मरला प्लॉट मिल सकता है। इनके आवंटन के तुरंत बाद सूर्या एन्क्लेव एक्सटेंशन 60 फीट की सड़क के साथ दामोरिया ब्रिज के जरिए शहर से जोड़ा जाएगा। इससे 2011 से आवंटित भूखंडों के मालिकों और इस तरफ की सभी कॉलोनियों के निवासियों को लाभ होगा और शहर की यातायात समस्या का भी समाधान होगा। मास्टर गुरबंता सिंह एन्क्लेव की इमारत के लिए उन उच्च अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, जिन्होंने 11 फुट संकरी सड़क पर बिना तकनीकी मंजूरी के इमारत का निर्माण किया और इस सड़क को 45 फुट तक चौड़ा किया जाएगा। प्रोफेसर संघेड़ा ने बताया कि महाराजा रणजीत सिंह एवेन्यू और सूर्या एन्क्लेव में जनता को पेश आ रही सीवरेज समस्या को हल करने के लिए 1.32 करोड़ रुपये की लागत वाले काम में बारिश के कारण देरी हुई है, इसे भी एक महीने के भीतर हल कर दिया जाएगा।


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