मेले में लगे झूले भी सारी रात चलते रहे और बाजार भी सारी रात खुले रहे। लोगों ने रातभर मेले में लगी दुकानों में खरीददारी की। बता मेले में जगह जगह लंगर भी लगाए थे। मेले को लेकर प्रशासन ने बड़े पुख्ता प्रबंध किये हुए थे।
ऐसी मान्यता है कि चड्ढा बिरादरी बाबा सोढल को अपने जठेरे के रूप में पूजती है। चड्ढा बिरादरी के जठेरे बाबा सोढल में हर धर्म व समुदाय के लोग नतमस्तक होने के लिए आते हैं। बाबा के दरबार में 14 रोट का प्रसाद चढ़ता है। इनमें से 7 रोट प्रसाद के रूप में वापस मिल जाते हैं। इस प्रसाद को उस परिवार की बेटी तो खा सकती है, लेकिन उसके पति व बच्चों को देना वर्जित है।
बता दे कि लोग मुरादें पूरी हो जाने पर ढोल-बैंड बाजों के साथ बच्चों को खुशी-खुशी साथ लाकर श्री सिद्ध बाबा सोढल के मंदिर में आकर माथा टेकते हैं। इसके बाद मंदिर परिसर में ही बने तालाब में जाकर बाबा सोढल की मूर्ति पर दूध चढ़ाकर एवं तालाब में दूध से बने अमृत का छींटा लेकर अपनी यात्रा को संपूर्ण मानते हैं।
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