जालंधर : महानगर जालंधर के डिप्टी कमिश्नर घनश्याम थोरी ने 2018 के बाद विकसित हुई अवैध कालोनियों में रजिस्ट्रियों पर रोक लगा दी है। वहीँ इन कालोनियों को विकसित करने वालों के खिलाफ पंजाब अपार्टमेंट एंड प्रापर्टी रेगुलाइजेशन एक्ट (पापरा) के तहत केस भी दर्ज होंगे। श्री थोरी ने एसडीएम एक और एसडीएम दो, तहसीलदार एक और तहसीलदार दो को लिखे पत्र में कहा है कि इन कालोनियों को विकसित करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और वहीँ इन कालोनियों में किसी भी प्लाट की रजिस्ट्री न की जाए।
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डिप्टी कमिश्नर घनश्याम थोरी के इन आदेशों से नगर निगम की हद में 100 से ज्यादा कालोनियों में रजिस्ट्रियों पर बैन लग गया है। बता दे कि वहीँ 40 कालोनियों के खिलाफ तो नगर निगम ने पहले ही पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर केस दर्ज करने की सिफारिश की हुई है।
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आपको बता दे कि नगर निगम कमिश्नर करनेश शर्मा ने ही डिप्टी कमिश्नर को पत्र लिखकर मांग की थी कि अवैध कालोनियां विकसित करने वाले कालोनाइजरों के खिलाफ पापरा एक्ट के तहत कार्रवाई की जाए और इन कालोनियों में रजिस्ट्री पर भी रोक लगाई जाए। वहीँ डीसी के इस आदेश के बाद शहर में करीब 10 हजार प्लाट होल्डर्स प्रभावित होंगे। वहीँ साल 2018 से पहले विकसित हुई कालोनियों को सरकार की पालिसी के तहत फीस देकर रेगुलर करवाया जा सकता है।
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जालंधर में 2018 के बाद विकसित हुई अवैध कालोनियों में रजिस्ट्री पर लगी रोक
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जालंधर : महानगर जालंधर के डिप्टी कमिश्नर घनश्याम थोरी ने 2018 के बाद विकसित हुई अवैध कालोनियों में रजिस्ट्रियों पर रोक लगा दी है। वहीँ इन कालोनियों को विकसित करने वालों के खिलाफ पंजाब अपार्टमेंट एंड प्रापर्टी रेगुलाइजेशन एक्ट (पापरा) के तहत केस भी दर्ज होंगे। श्री थोरी ने एसडीएम एक और एसडीएम दो, तहसीलदार एक और तहसीलदार दो को लिखे पत्र में कहा है कि इन कालोनियों को विकसित करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और वहीँ इन कालोनियों में किसी भी प्लाट की रजिस्ट्री न की जाए।
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डिप्टी कमिश्नर घनश्याम थोरी के इन आदेशों से नगर निगम की हद में 100 से ज्यादा कालोनियों में रजिस्ट्रियों पर बैन लग गया है। बता दे कि वहीँ 40 कालोनियों के खिलाफ तो नगर निगम ने पहले ही पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर केस दर्ज करने की सिफारिश की हुई है।
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आपको बता दे कि नगर निगम कमिश्नर करनेश शर्मा ने ही डिप्टी कमिश्नर को पत्र लिखकर मांग की थी कि अवैध कालोनियां विकसित करने वाले कालोनाइजरों के खिलाफ पापरा एक्ट के तहत कार्रवाई की जाए और इन कालोनियों में रजिस्ट्री पर भी रोक लगाई जाए। वहीँ डीसी के इस आदेश के बाद शहर में करीब 10 हजार प्लाट होल्डर्स प्रभावित होंगे। वहीँ साल 2018 से पहले विकसित हुई कालोनियों को सरकार की पालिसी के तहत फीस देकर रेगुलर करवाया जा सकता है।
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