उन्होंने आगे कहा कि किसी को भी सनातन धर्म के खिलाफ प्रचार करने अथवा गलत टिप्पणियां करने की इजाजत नहीं दी जाएगी कोई भी व्यक्ति चाहे वह धार्मिक समाजिक यां राजनीतिक से संबंधित हो वह अगर सनातन धर्म पर कोई भी ग़लत टिप्पणी करता है तो भगवान परशुराम सेवा संघ इसका प्रतिशोध लेने में पिछे नहीं हटेगा।श्री जोशी ने आगे कहा कि हमारा मुख्य उद्देश्य सनातन धर्म को शिक्षित तथा विकसित करना है ताकि कोई भी सनातनी सनातनी होने पर गर्व महसूस कर सकें।
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सनातन धर्म के खिलाफ कोई भी ज्यादती एवं टिप्पणी बर्दाश्त नहीं की जाएगी
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भगवान परशुराम सेवा संघ का एक ही लक्ष्य है,सनातन धर्म का झंडा पूरे विश्व में बुलंद करना : कमलदेव जोशी
जालंधर : भगवान परशुराम सेवा संघ के राष्ट्रीय चेयरमैन कमलदेव जोशी ने अपना वक्तव्य जारी करते हुए कहा कि आज सबसे बड़ी जरूरत है तो वह है सनातन धर्म का झंडा पूरे विश्व में बुलंद करने की। उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान अथवा अन्य देशों में हिन्दू सिक्खों के मन्दिरों, गुरद्वारों पर आए दिन हो रहे हमले इस बात का सबूत है कि सनातनी आपस में बटे हुए हैं। अगर हम सब एक जूट होकर अपनी ताकत का प्रदर्शन करने में कामयाब हो जाते हैं तो हमारे धार्मिक स्थलों पर प्रहार करने वाले तथा जबर्दस्ती धर्म परिवर्तन करने वालों पर लगाम लगाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि भगवान परशुराम सेवा संघ का एक मात्र उद्देश्य यही है कि हम सब सनातनियों को एक जूट कर विश्व में सनातन धर्म का परिचम फहरा सकें।
उन्होंने आगे कहा कि किसी को भी सनातन धर्म के खिलाफ प्रचार करने अथवा गलत टिप्पणियां करने की इजाजत नहीं दी जाएगी कोई भी व्यक्ति चाहे वह धार्मिक समाजिक यां राजनीतिक से संबंधित हो वह अगर सनातन धर्म पर कोई भी ग़लत टिप्पणी करता है तो भगवान परशुराम सेवा संघ इसका प्रतिशोध लेने में पिछे नहीं हटेगा।श्री जोशी ने आगे कहा कि हमारा मुख्य उद्देश्य सनातन धर्म को शिक्षित तथा विकसित करना है ताकि कोई भी सनातनी सनातनी होने पर गर्व महसूस कर सकें।
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उन्होंने आगे कहा कि किसी को भी सनातन धर्म के खिलाफ प्रचार करने अथवा गलत टिप्पणियां करने की इजाजत नहीं दी जाएगी कोई भी व्यक्ति चाहे वह धार्मिक समाजिक यां राजनीतिक से संबंधित हो वह अगर सनातन धर्म पर कोई भी ग़लत टिप्पणी करता है तो भगवान परशुराम सेवा संघ इसका प्रतिशोध लेने में पिछे नहीं हटेगा।श्री जोशी ने आगे कहा कि हमारा मुख्य उद्देश्य सनातन धर्म को शिक्षित तथा विकसित करना है ताकि कोई भी सनातनी सनातनी होने पर गर्व महसूस कर सकें।
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