Marriage Rituals : शादी के मौके पर दुल्हे राजा घोड़ी पर चढ़कर शादी के मंडप तक पहुँचता है। आपने भी देखा होगा जब लड़के की शादी होती है, तो वह बारात ले जाते समय घोड़ी पर सवार होकर जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है आखिर दूल्हा घोड़ी पर ही क्यों बैठकर बारात ले जाता है। आज हम इस खबर में इस बात पर ही चर्चा करेंगे कि आखिर दूल्हा बारात ले जाते समय घोड़ी पर सवार होकर ही क्यों जाता है।
1. कहते है दूल्हा जब घोड़ी के ऊपर चढ़ता है तो यह उसका एक तरह से टेस्ट होता है। ऐसा माना जाता है कि यदि दूल्हा घोड़ी के ऊपर अच्छे से चढ़ गया तो वह सारी जिम्मेदारियां निभा लेगा। वह भविष्य में अपनी बीवी और बच्चों का अच्छे से ध्यान रख पाएगा। जिस तरह वह अपनी बारात में घोड़ी को नियंत्रित करेगा वैसे ही अपनी शादीशुदा लाइफ में जिम्मेदारियों को अच्छे से निभाएगा।
2. घोड़ी के ऊपर दूल्हे के चढ़ने की भी एक खास वजह है। दरअसल घोड़ी घोड़े की तुलना में ज्यादा चंचल होती है। इसलिए उसे नियंत्रित करना और उसकी सवारी करना ज्यादा कठिन होता है। ऐसा माना जाता है घोड़ी पर सवारी करने का यह मतलब होता है कि दूल्हा अब अपना बचकाना व्यवहार छोड़ चुका है और सीरियस होकर अपनी जिम्मेदारियों को अच्छे से निभा रहा है। वह अपनी शादीशुदा लाइफ में आने वाली जिम्मेदारियों को कंधे पर उठाने के लिए रेडी है।
3. दूल्हे का घोड़ी के ऊपर चढ़ने का धार्मिक महत्व भी है। भगवान श्रीराम ने भी अश्वमेध यज्ञ के लिए एक घोड़े का इस्तेमाल किया था। घोड़े पर बैठने का अर्थ होता है कि हम चुनौतियों को स्वीकार कर रहे हैं। रामायण और महाभारत में कई बार इस बात का जिक्र पढ़ने को मिलता है कि कैसे बड़े-बड़े युद्ध में महासूरवीर लोग घोड़े का इस्तेमाल करते थे। घोड़े पर नियंत्रण करने की तुलना इंद्रियों पर नियंत्रण करने के समान भी मानी जाती है।
4. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब दूल्हा घोड़ी चढ़ता है, तो सूर्य देव की पत्नी की कृपा प्राप्त होता है और वैवाहिक जीवन में मजबूती प्रदान करती है। साथ ही दूल्हे-दुल्हन का वैवाहिक जीवन सुख-समृद्धि और संपन्नता के साथ बीतता है।
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