Latest news
अवैध संबंध के शक में पति ने की क्रूरता , पत्नी के काटे दोनों हाथ वाल्मीकि संगठनों द्वारा पंजाब बंद के आह्वान का जालंधर में दिखा पूरा असर 27 जुलाई को पंजाब बंद का ऐलान, जानिए क्या-क्या रहेगा बंद चीन ने अंतरिक्ष में लांच किया हाईटैक AI निगरानी उपग्रह केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को मिला शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार Breaking News : शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा, CJP प्रदर्शन के बीच बड़ा फैसला बड़ी खबर : केंद्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू ने कैबिनेट से इस्तीफा दिया लुधियाना की दमनप्रीत कौर की कनाडा में उसके लिव-इन पार्टनर ने गला घोंटकर की हत्या CJP Protest : सुप्रीम कोर्ट के वकील भी आये छात्रों के समर्थन में पंजाब पुलिस के ASI ने नहर में लगाई छलांग, घटना से पहले बनाया वीडियो

India Living News

Hot News
You are currently viewing प्रसिद्ध बाबा सोडल मेला 6 सितंबर 2025 को , देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुँचते है

प्रसिद्ध बाबा सोडल मेला 6 सितंबर 2025 को , देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुँचते है

जालंधर : इस बार प्रसिद्ध बाबा सोडल मेला 6 सितंबर 2025 को है। यह मेला पंजाब के जालंधर शहर में आयोजित होता है और ये मेला बाबा सोडल की याद में भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। सोढल मंदिर में प्रसिद्ध ऐतिहासिक सोढल सरोवर है जहां सोढल बाबा की विशाल प्रतिमा स्थापित की गई है। श्रद्धालु इस पवित्र सरोवर के जल से अपने ऊपर छिड़काव करते हैं और चरणामृत की तरह पीते हैं। इस दिन देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु बाबा सोढल के दर्शन करने आते हैं। मेले से 2-3 दिन पहले शुरू होने वाली भक्तों की भीड़ मेले के बाद भी 2-3 दिन तक लगातार बरकरार रहती है।

बता दे मेला हर साल सितंबर महीने में आयोजित होता है। यह पंजाब का एक महत्वपूर्ण और लोकप्रिय मेला है, जिसमें देश-विदेश से श्रद्धालु भाग लेते हैं।प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष प्रबंध किए जाते हैं ।

परंपरा अनुसार कैसे होता है पूजन
बाबा सोढल का जन्म जालंधर शहर में चड्ढा परिवार में हुआ था। सोढल बाबा के साथ कई कहानियां जुड़ी हुई हैं। कहते हैं कि जब सोढल बाबा बहुत छोटे थे, वह अपनी माता के साथ एक तालाब पर गए। माता कपड़े धोने में व्यस्त थीं और बाबा जी पास ही में खेल रहे थे। तालाब के नजदीक आने को लेकर माता ने बाबा को कई बार टोका और नाराज भी हुईं। बाबा जी के न मानने पर माता ने गुस्से में उन्हें कोसा और कहा जा गर्क जा। इस गुस्से के पीछे माता का प्यार छिपा था। बाबा सोढल ने माता के कहे अनुसार तालाब में छलांग लगा दी। माता के अपने पुत्र द्वारा तालाब में छलांग लगाने पर विलाप शुरू कर दिया। थोड़ी देर बाद बाबा जी पवित्र नाग देवता के रूप में प्रकट हुए।

उन्होंने चड्ढा और आनंद बिरादरी के परिवारों को उनके पुनर्जन्म को स्वीकार करते हुए मट्ठी जिसे टोपा कहा जाता है चढ़ाने का निर्देश दिया। इस टोपे का सेवन केवल चड्ढा और आनंद परिवार के सदस्य ही कर सकते हैं। इस प्रसाद का सेवन परिवार में जन्मी बेटी तो कर सकती है मगर दामाद व उसके बच्चों के लिए यह वर्जित है। सोढल मेले वाले दिन श्रद्धालु पवित्र तालाब से अपने प्रत्येक पुत्र के नाम की मिट्टी 14 बार निकालते हैं। श्रद्धालु अपने-अपने घरों में पवित्र खेत्री बीजते हैं, जो हर परिवार की खुशहाली और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है। मेले वाले दिन इसे बाबा जी के श्रीचरणों में अर्पित करके माथा टेकते हैं।


Leave a Reply