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दिल्ली में बुजुर्ग डॉक्टर दंपति के साथ साइबर ठगी, 15 करोड़ लुट गए

नेशनल न्यूज़ : दिल्ली के पॉश इलाके ग्रेटर कैलाश से साइबर ठगी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां रहने वाले एक बुजुर्ग डॉक्टर दंपति को साइबर अपराधियों ने 15 दिनों तक मानसिक दबाव में रखकर करीब 15 करोड़ रुपये की ठगी का शिकार बना लिया।

संयुक्त राष्ट्र में किया कई साल काम

पीड़ित डॉक्टर दंपति की पहचान डॉ. ओम तनेजा और उनकी पत्नी डॉ. इंदिरा तनेजा के रूप में हुई है। दोनों ने संयुक्त राष्ट्र में कई साल तक काम किया है। अमेरिका में लंबा करियर पूरा करने के बाद वे साल 2016 में भारत लौटे थे और दिल्ली में शांत जीवन जी रहे थे।

ऐसे शुरू हुई ठगी की कहानी

24 दिसंबर 2025 को डॉक्टर दंपति के पास एक फोन आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताया। उसने कहा कि उनके आधार कार्ड से जुड़े एक बैंक खाते का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और ड्रग तस्करी जैसे गंभीर अपराधों में हुआ है। फोन के कुछ देर बाद एक वीडियो कॉल आया। कॉल पर पुलिस की वर्दी पहने लोग दिखे, जिनके पीछे दिल्ली पुलिस का लोगो लगा था। सभी अधिकारी बेहद गंभीर नजर आ रहे थे। इसी के साथ बुजुर्ग दंपति को बताया गया कि वे अब ‘डिजिटल अरेस्ट’ में हैं। साइबर ठगों ने साफ कहा कि वे घर से बाहर नहीं निकल सकते, किसी से बात नहीं कर सकते और फोन कॉल बंद करना भी अपराध माना जाएगा। उन्हें हर वक्त वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा गया, जिससे वे पूरी तरह डर और तनाव में आ गए।

नकली कोर्ट और जज का भी रचा गया नाटक

इसके बाद अगली वीडियो कॉल में एक फर्जी कोर्ट दिखाई गई। काले कोट में बैठा नकली जज, कोर्ट जैसा माहौल और दीवारों पर लगी तस्वीरें सब कुछ बिल्कुल असली जैसा लग रहा था। जज बने ठग ने धमकी दी कि सहयोग न करने पर तुरंत गिरफ्तारी और संपत्ति जब्त कर ली जाएगी। यह मामला इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि इसमें साइबर अपराधियों ने फर्जी पुलिस के साथ-साथ नकली सुप्रीम कोर्ट और जज तक तैयार कर लिए थे।

वहीँ जब डॉ. तनेजा को कुछ शक हुआ और उन्होंने स्थानीय SHO से बात करने की कोशिश की, तो साइबर ठगों ने उसी SHO को वीडियो कॉल पर धमकाया। नकली जज ने दावा किया कि यह मामला सीधे सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में है और स्थानीय पुलिस इसमें दखल नहीं दे सकती।

लुट गई जिंदगी भर की कमाई

24 दिसंबर से 9 जनवरी तक पूरे 15 दिन तक डॉक्टर दंपति अपने ही घर में डिजिटल रूप से कैद रहे। ठगों ने अलग-अलग बहानों से उन्हें पैसे ट्रांसफर करने को मजबूर किया। कभी जांच शुल्क, कभी जमानत, तो कभी कोर्ट वेरिफिकेशन के नाम पर रकम मांगी गई। हर बार उन्हें अरेस्ट मेमो, कोर्ट आदेश, बैंक नोटिस और सरकारी मुहर लगे फर्जी दस्तावेज भेजे गए। सब कुछ बेहद प्रोफेशनल तरीके से किया गया। इस दौरान उनके खातों से करीब 14 करोड़ 85 लाख रुपये निकाल लिए गए।

विदेश में हैं बच्चे

डॉक्टर दंपति के बच्चे विदेश में रहते हैं। वे ग्रेटर कैलाश स्थित अपने घर में अकेले रह रहे थे, जिसका फायदा साइबर ठगों ने उठाया, जब दंपति को एहसास हुआ कि उनके साथ ठगी हो चुकी है, तब उन्होंने दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की साइबर यूनिट से संपर्क किया। पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है। बैंक ट्रांजेक्शन, कॉल रिकॉर्ड, आईपी एड्रेस और फर्जी दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है।


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