Latest news
जालंधर : तेजदार हथियार दिखा कर लूट और झपटमारी की वारदाते करने वाले आरोपियों को पुलिस ने किया गिरफ्ता... जालंधर में दर्दनाक हादसा : बस की चपेट में आने से Delivery Boy की मौत सुखबीर बादल पर हमले के बाद अमृतसर में पूर्व जत्थेदार रघबीर सिंह के घर के बाहर फायरिंग पटियाला में पिटबुल डॉग के मालिक पर FIR : मकान देखने आए कपल पर किया था हमला पंजाब के पूर्व डिप्‍टी सीएम सुखबीर सिंह बादल पर नांदेड़ में जानलेवा हमला जालंधर में बड़ी वारदात : पत्नी और पिता का मर्डर कर आरोपी फरार स्वतंत्रता दिवस से पहले DGP गौरव यादव ने जिला पुलिस प्रमुखों को पेट्रोलिंग और निगरानी बढ़ाने का दिया... विजिलेंस ने 15 हजार रुपये रिश्वत लेते पटवारी को रंगे हाथ किया गिरफ्तार गोराया में पुल से नीचे गिरी क्रेटा कार, दो लोग घायल जालंधर में SIR प्रक्रिया के पहले चरण का डेटा जारी

India Living News

Hot News
You are currently viewing श्री सिद्ध बाबा सोढल मेला 17 सितंबर को, माथा टेकने पहुंचने लगे श्रद्धालु

श्री सिद्ध बाबा सोढल मेला 17 सितंबर को, माथा टेकने पहुंचने लगे श्रद्धालु

जालंधर : श्री सिद्ध बाबा सोढल का मेला चाहे 17 सितंबर को है परंतु बाबा सोढल के दर पर शीश निवाने श्रद्धालुओं का आवागमन शुरू हो चुका है। ऐसे में जालंधर नगर निगम ने भी मेले को लेकर सभी तैयारिययों को अंजाम देना शुरू कर दिया है। सोढल मेला परिसर में कंट्रोल रूम स्थापित कर दिया गया है जो मेले के अगले दिन यानी 18 सितंबर तक रहेगा। एडीशनल कमिश्नर ने लिखित आदेश निकालकर तमाम अधिकारियों की ड्यूटी सोडल मेले के विभिन्न कार्यों हेतु लगा दी है। निगम अधिकारीयों ने सोढल मेला क्षेत्र का दौरा किया और तमाम व्यवस्थाओं को देखा। उन्होंने मौके पर ही अधिकारियों को कई निर्देश भी दिए।

बता दे जालंधर शहर में भादों के महीने में शुक्ल पक्ष के 14वें दिन हर साल बाबा सोढल मेला आयोजित किया जाता है। देशभर से लाखों श्रद्धालु इस मेले में सोढल बाबा के दर्शन करने आते हैं। सोढल मंदिर में प्रसिद्ध ऐतिहासिक सोढल सरोवर है जहां सोढल बाबा की विशाल प्रतिमा स्थापित की गई है। श्रद्धालु इस पवित्र सरोवर के जल से अपने ऊपर छिड़काव करते हैं और चरणामृत की तरह पीते हैं। इस दिन देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु बाबा सोढल के दर्शन करने आते हैं। मेले से 2-3 दिन पहले शुरू होने वाली भक्तों की भीड़ मेले के बाद भी 2-3 दिन तक लगातार बरकरार रहती है।

बाबा सोढल का जन्म जालंधर शहर में चड्ढा परिवार में हुआ था। सोढल बाबा के साथ कई कहानियां जुड़ी हुई हैं। कहते हैं कि जब सोढल बाबा बहुत छोटे थे, वह अपनी माता के साथ एक तालाब पर गए। माता कपड़े धोने में व्यस्त थीं और बाबा जी पास ही में खेल रहे थे। तालाब के नजदीक आने को लेकर माता ने बाबा को कई बार टोका और नाराज भी हुईं। बाबा जी के न मानने पर माता ने गुस्से में उन्हें कोसा और कहा जा गर्क जा। इस गुस्से के पीछे माता का प्यार छिपा था। बाबा सोढल ने माता के कहे अनुसार तालाब में छलांग लगा दी। माता के अपने पुत्र द्वारा तालाब में छलांग लगाने पर विलाप शुरू कर दिया। थोड़ी देर बाद बाबा जी पवित्र नाग देवता के रूप में प्रकट हुए।

उन्होंने चड्ढा और आनंद बिरादरी के परिवारों को उनके पुनर्जन्म को स्वीकार करते हुए मट्ठी जिसे टोपा कहा जाता है चढ़ाने का निर्देश दिया। इस टोपे का सेवन केवल चड्ढा और आनंद परिवार के सदस्य ही कर सकते हैं। इस प्रसाद का सेवन परिवार में जन्मी बेटी तो कर सकती है मगर दामाद व उसके बच्चों के लिए यह वर्जित है।

सोढल मेले वाले दिन श्रद्धालु पवित्र तालाब से अपने प्रत्येक पुत्र के नाम की मिट्टी 14 बार निकालते हैं। श्रद्धालु अपने-अपने घरों में पवित्र खेत्री बीजते हैं, जो हर परिवार की खुशहाली और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है। मेले वाले दिन इसे बाबा जी के श्रीचरणों में अर्पित करके माथा टेकते हैं।


Leave a Reply