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General Insurance Employees Union द्वारा जालंधर में सेमीनार आयोजित किया गया

जिसका शीर्षक था ” सामान्य बीमा उद्योग और कार्यबल के समक्ष चुनौतियां “

जालंधर 8 अगस्त 2024 : अखिल भारतीय बीमा कर्मचारी संघ से संबद्ध चंडीगढ़ क्षेत्र सामान्य बीमा कर्मचारी संघ ने आज 8 अगस्त 2024 को जालंधर में एक सम्मेलन आयोजित किया जिसका शीर्षक था ” सामान्य बीमा उद्योग और कार्यबल के समक्ष चुनौतियां “

हैदराबाद से आये हुए अखिल भारतीय बीमा कर्मचारी संघ के महासचिव कॉम.श्रीकांत मिश्रा , चेन्नई से आये हुए कॉम जी.आनंद ,उपाध्यक्ष एआईआईईए, कोलकाता से आये हुए कॉम संजय झा , सचिव स्थायी समिति , एआईआईए , कॉम. अनिल चोपड़ा , अध्यक्ष उत्तरी क्षेत्र , कॉम मंजीत सिंह , महासचिव चंडीगढ़ क्षेत्र , और चंडीगढ़ क्षेत्र के अध्यक्ष कॉम जेपी शर्मा ने बैठक को संबोधित किया।

संबोधन में उन्होंने बताया सामान्य क्षेत्र की यह जीआई कंपनी राष्ट्रीयकरण यानि 1971 से ही सस्ती बीमा पॉलिसियों के माध्यम से जनता की सेवा करने के लिए प्रतिबद्ध है। इन चारों कंपनियों ने सस्ते नए उत्पाद तैयार किये है , ग्रामीण केंद्रों में भी कार्यकाल खोले है और सरकार द्वारा प्रायोजित बीमा योजनाओं को भी सेवाएं प्रधान की है।

वर्ष 2001 में निजी खिलाडियों के लिए बाजार खोले जाने के बाद से उन्हें निजी कंपनियों से कड़ी और अनैतिक प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद वे 32% की बाजार हिस्सेदारी बनाये रखने में सक्षम है और आम आदमी को सेवा प्रदान करना जारी रखे हुए है।

उन्होंने बताया इन कंपनियों ने पिछले वित्तीय वर्ष में 12% की वृद्धि दर्ज़ की है जो भारतीय अर्थ व्यवस्था की वृद्धि से बेहतर है। कृषि बीमा कम्पनी और जीआईसी री (सार्वजनिक क्षेत्र की विशेष बीमा और पुनर्बीमा कम्पनी ) के साथ इन कंपनियों ने वित्तीय वर्ष 2023-2024 में 7500 करोड़ का लाभ कमाया है। उन्होंने अन्य करों के अलावा जीएसटी के रूप में सरकार को लगभग 1500 करोड़ का योगदान दिया है। उन्होंने कहा सरकार इन पीएसजी आई कंपनियों को बेचने की कोशिश कर रही है और वर्ष 2021 में एक अधनियम पारित किया गया था जिसे जीआईबीएनए संशोधन अधनियम कहा जाता है जो 100 % निजीकरण का मार्ग प्रशस्त करता है।

एआईआईईए के नेतृत्व में जीआई में यूनियने सरकार की नीतियों के खिलाफ लड़ रही है , हालांकि बिल अधिनियमित हो गया है। वे पहले ही 360 सांसदों से उनका समर्थन मांगने के लिए मिल चुके है। यूनियन का विशवास है कि चार पीएस जी आई कंपनियों का विलय और इसे एलआईसी की तरह एक अखंड निगम बनाना रामबाण है। कई सांसदों ने जीएसटी के खिलाफ और सार्वजनिक क्षेत्र की सामान्य बीमा कंपनियों के विलय के लिए संसद में बात की है। उन्होंने बताया यह सेमीनार पीएसजीआई कंपनियों के विलय के समर्थन में जनमत बनाने के लिए आयोजित किया गया है।


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