Latest news
प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को जड़े थप्पड़ Google Play Store पर असली और फेक सरकारी ऐप्स को कैसे पहचाने ? चंडीगढ़ में पीजीआई के पास मेडिकल स्टोर पर ताबड़तोड़ गोलियां चली जरूरी खबर : अब बिना पंजीकृत मोबाइल नंबर OTP के नहीं बनेगा वाहन का प्रदूषण सर्टिफिकेट जालंधर में किशनपुरा चौक के पास कपडे के शोरूम पर फायरिंग मणिकर्ण में पार्वती नदी किनारे फोटो खिंचवाते बहे पंजाब के 3 पर्यटक, मुश्किल से किया किया रेस्क्यू जालंधर में ट्रक की टक्कर से स्कूटी सवार महिला की हुई मौत, पति गंभीर घायल महंगाई का झटका : फिर बढ़े घरेलू LPG सिलेंडर के दाम जंतर-मंतर पर छात्रों का जोरदार प्रदर्शन : कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके और सामाजिक कार... दुखद समाचार : माँ देवी राज रानी जी, राजेश्वरी धाम देवी राज रानी वैष्णो मंदिर की संस्थापक हुए ब्रह्मल...

India Living News

Hot News
You are currently viewing पंजाब में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी, पेरेंट्स को सोशल मीडिया पर कमेंट- घूमने के लिए पैसे हैं तो फीस के लिए क्यों नहीं
private-school-commented-on-the-students-parents-facebook-id-in-jalandhar

पंजाब में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी, पेरेंट्स को सोशल मीडिया पर कमेंट- घूमने के लिए पैसे हैं तो फीस के लिए क्यों नहीं

जालंधर : आल पेरेंट्स एसोसिएशन की तरफ से स्कूलों की मनमानी के विरोध में फिर से आवाज उठाई गई। अभिभावकों का कहना है कि डीसी साहिब की तरफ से स्कूलों की मनमानी के विरोध में पत्र निकालने के बावजूद स्कूल हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना करने से बाज नहीं आ रहे हैं। यहां तक की अब स्कूलों की तरफ से अभिभावकों के सोशल मीडिया पर एक्टिव अकाउंट्स को देख कर उन पर कमेंट करने शुरू कर दिए हैं। आल पेरेंट्स एसोसिएशन ने कहा कि स्कूल अभिभावकों के सोशल मीडिया अकाउंट पर देख रहा है कि आप कहां घूमने गए थे और आपका पहरावा कैसा है। उस हिसाब से जजमेंट की जा रही है कि अभिभावक बच्चों की फीसें दे सकते हैं या नहीं।

आल पेरेंट्स एसोसिएशन के सदस्यों ने कहा कि स्कूल अभिभावकों पर तंज कसते है कि आपके पास घूमने के लिए पैसे हैं लेकिन बच्चों की फीसें देने के के लिए पैसे नहीं है। आल पेरेंट्स एसोसिएशन ने कहा कि यह किसी एक स्कूल की बात नहीं है बल्कि हरेक स्कूलों की तरफ से इसी तरह से किया जा रहा है। अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों की तरफ से इस तरह की हरकतें और व्यवहार उचित नहीं हैं। अगर इसी तरह से चलता रहा तो वे सड़कों पर आएंगे और मंत्रियों के घरों का घेराव करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। क्योंकि डीसी के आदेशों के बावजूद न तो स्कूल मान रहे हैं और न ही जिला शिक्षा अधिकारी की तरफ से स्कूलों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई की जा रही है।

यही कारण है कि उन्हें बार-बार स्कूलों के विरोध में खड़े होना पड़ रहा है, इससे उन्हें ही नहीं उनके बच्चों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा रहा है। क्योंकि स्कूलों की तरफ से न तो रिजल्ट जारी किया गया है और न ही उनकी तरफ से आनलाइन क्लासों में उनके बच्चे का नाम जोड़ा गया है।

 

source link


Leave a Reply