नेशनल न्यूज़ : मोदी सरकार ने टोल टैक्स को लेकर बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय सड़क और परिवहन मंत्रालय ने टोल टैक्स को लेकर नए नियम बनाए हैं। अब ऐसे निजी वाहन चालकों को टोल टैक्स नहीं देना होगा जो ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम यूज करते हों। इसके साथ ही अगर वे टोल रोड का यूज 20 किमी. के दायरे में करते हैं तो उन्हें कोई भी टैक्स नहीं देना होगा। इसके साथ ही नियम पूरे देश में लागू करने के लिए कहा गया है।
परिवहन मंत्रालय द्वारा जारी की गई अधिसूचना के अनुसार निजी वाहन मालिकों को प्रतिदिन राजमार्गों और एक्सप्रेस वे पर 20 किलोमीटर तक की यात्रा के लिए कोई टैक्स नहीं देना होगा। हालांकि यह छूट उन लोगों को मिलेगी, जिनके वाहनों में जीएनएसएस सिस्टम चालू होगा। वहीं अगर निजी वाहन चालक 20 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करते हैं तो टोल वास्तविक दूरी के आधार पर ही लिया जाएगा।
क्या है GNSS और इसका उपयोग?
ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) एक आधुनिक तकनीक है, जिसे वाहन ट्रैकिंग और नेविगेशन के लिए उपयोग किया जाता है। यह तकनीक GPS (Global Positioning System) के समान है, जो वाहन की सटीक स्थिति और यात्रा मार्ग का पता लगाती है। इस प्रणाली को सड़क और परिवहन मंत्रालय ने हाल ही में फास्टैग के साथ मिलाकर टोल कलेक्शन सिस्टम के तौर पर लागू किया है। GNSS सिस्टम के माध्यम से वाहन की यात्रा को ट्रैक किया जाता है, और इसके आधार पर ही टोल शुल्क की गणना की जाती है। इस सिस्टम का इस्तेमाल पहले से ही कुछ प्रमुख राजमार्गों और एक्सप्रेस वे पर किया जा रहा है।
बता दें कि सड़क और परिवहन मंत्रालय ने कुछ दिन पहले ही फास्टैग के साथ ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम पर आधारित टोल सिस्टम लागू किया है। हालांकि पूरे देश में इस सिस्टम का यूज नहीं किया गया जा रहा है, फिलहाल सरकार पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसे कर्नाटक में नेशनल हाईवे 275 के बेंगलुरु-मैसूर खंड और हरियाणा में नेशनल हाईवे 709 के पानीपत-हिसार हाईवे पर लागू किया गया है। इसकी रिपोर्ट के आधार पर ही सरकार देश के अन्य हाईवेज पर भी ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम को लागू किया जाना है।











