कानपुर : एक हैरान कर देने वाली अजीब खबर सामने आई है कि कानपुर में एक परिवार पिछले डेढ़ साल तक लाश के साथ रह रहा था और लोगों को खबर तक न लग सकी। मिली जानकारी अनुसार 35 साल के आयकर अधिकारी विमलेश सोनकर की कोरोना की दूसरी लहर में 22 अप्रैल 2021 को मौत हो गई थी। जबकि अस्पताल ने डेथ सर्टिफिकेट भी जारी कर दिया। लेकिन, परिवार ने नहीं माना कि विमलेश मर गया है। उनको लगा वह कोमा में है।
बताया जा रहा है रावतपुर के कृष्णापुरी इलाके में विमलेश का संयुक्त परिवार रहता है। उसके दो भाई, उनकी पत्नियां, बच्चे, माता-पिता एक घर में रहते हैं। यानी जहां लाश को रखा गया उस घर में 10 से ज्यादा मेंबर्स रहते हैं। बता दे कि इस बात का शुक्रवार को खुलासा तब हुआ जब विमलेश के लगातार ड्यूटी में न आने पर आयकर विभाग की टीम उनकी तलाश करते हुए घर तक पहुंची। वहां टीम को हैरान कर देने वाला मंझर नज़र आया उनको कमरे में विमलेश की ममी जैसी बन चुकी लाश मिली।
परिवार के अनुसार 23 अप्रैल की सुबह परिजन शव का अंतिम संस्कार करने जा रहे थे। तभी उन्हें शरीर में हरकत का एहसास हुआ। उन्होंने हाथ में ऑक्सीमीटर लगाया तो पल्स रेट और ऑक्सीजन लेवल बताने लगा। तब परिवार ने अंतिम संस्कार कैंसल कर दिया। तब कोरोना का वक्त था। ऐसे में अंतिम संस्कार में सिर्फ परिवार के लोग ही थे। परिवार ने फिर विमलेश को दूसरे हॉस्पिटल में भर्ती कराने का प्रयास किया, लेकिन कोविड की महामारी में किसी हॉस्पिटल्स ने उसे एडमिट न किया।
तब विमलेश का परिवार उसके शव को जिंदा मानकर घर ले आया और उसकी सेवा में लग गया। बताया जा रहा है सुबह-शाम शव की डेटॉल से सफाई, तेल मालिश, रोजाना कपड़े और बिस्तर बदलना। कमरे का 24 घंटे एसी ऑन रखना। यह सब डेढ़ साल तक ऐसे ही चलता रहा है। बता दे अफसरों की टीम ने जब शव को बरामद किया तो उस पर साफ और नए जैसे कपड़े थे।
वहीँ पड़ोस के लोग जब कभी विमलेश के बारे में पूछते तो उसके परिजन कह देते थे कि विमलेश कोमा में हैं। आसपास के लोगों ने बताया कि परिवार थोड़ा रिजर्व रहता था। ऐसे में बाहरी लोगों से ज्यादा संपर्क नहीं था। जब आयकर विभाग ने भनक लगने पर पूरे मामले की सूचना कानपुर DM को दी। DM के निर्देश पर आयकर विभाग की टीम, डॉक्टर, ACP और थाना पुलिस शुक्रवार को विमलेश के घर पहुंचीं। जांच हुई तो पूरे मामले की सच्चाई सामने आई।