जालंधर : जालंधर उपचुनाव में हुई कम वोटिंग ने उम्मीदवारों के साथ-साथ सियासी दलों की टेंशन भी बढ़ा दी है। जालंधर में सभी पार्टियों के एग्रेसिव चुनाव प्रचार के बावजूद सिर्फ 54.5% वोटर ही पोलिंग बूथों तक पहुंचे। वर्ष 1999 से यह सीट कांग्रेस का गढ़ रही है और इस दौरान यहां वोटिंग प्रतिशत 60% या उससे अधिक रहा। इस बार मतदान अचानक करीब 6% कम घट गया। वोटिंग प्रतिशत में आई इस गिरावट का फायदा किसे होगा? इसको लेकर मंथन शुरू हो गया है। सभी पार्टियां अपने नेताओं, पोलिंग एजेंट और ग्राउंड लेवल पर काम कर रही टीमों से फीडबैक लेने में जुट गई हैं। जालंधर लोकसभा उपचुनाव के रिजल्ट 13 मई को आएंगे।