Latest news
भारतीय रिजर्व बैंक प्लास्टिक नोटों को लाने पर कर रहा विचार ? गर्मी से राहत पाने के लिए लोग पहुंच रहे पहाड़ों में , वहां भी मिल रहा घंटों लंबा जाम फगवाड़ा में लवली यूनिवर्सिटी के पास जालंधर के RTI एक्टिविस्ट सिमरनजीत की गोली मारकर हत्या पंजाब में मौसम ने ली करवट , इन जिलों में आंधी-बारिश का रेड अलर्ट पंजाब में निकाय चुनाव के परिणामों में AAP पार्टी का शानदार प्रदर्शन, जानें कांग्रेस-अकाली-भाजपा का ह... जालंधर में अब 1 जून से 9 और चौराहों पर होंगे E-Challan पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले BJP का बड़ा फैसला, केवल सिंह ढिल्लों बने नये प्रदेश अध्यक्ष पंजाब में नीले ड्रम में मिली लड़की की लाश, फैली सनसनी पेट्रोल डीज़ल के दामों में फिर बढ़ोतरी , 10 दिन में चाैथी बार इजाफा जालंधर में बड़ा हादसा : घर के मंदिर में लगे पंखे में शॉर्ट सर्किट से लगी आग, सिलिंडर फटा

India Living News

Hot News
You are currently viewing 26 दिसंबर को क्यों मनाया जाता है वीर बाल दिवस , जाने साहिबजादों की शहादत का इतिहास

26 दिसंबर को क्यों मनाया जाता है वीर बाल दिवस , जाने साहिबजादों की शहादत का इतिहास

वीर बाल दिवस : 26 दिसंबर का दिन भारत में वीर बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है. यह दिन सिखों के दसवें गुरु – गुरु गोबिंद सिंह जी के चार वीर पुत्रों के बलिदान और साहस के प्रति सम्मान जताने के लिए मनाया जाता है। वीर बाल दिवस गुरु जी के छोटे साहिबजादों – साहिबजादा जोरावर सिंह और साहिबजादा फतेह सिंह के बलिदान को समर्पित है। धर्म और मानवता की रक्षा के लिए जब उन्‍होंने अपने प्राण न्योछावर किए, तब साहिबजादा जोरावर सिंह की उम्र मात्र 9 वर्ष और साहिबजादा फतेह सिंह की उम्र मात्र 6 वर्ष थी।

वीर बाल दिवस क्‍यों मनाया जाता है
साल 2022 में 9 जनवरी को गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश पर्व के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की थी कि 26 दिसंबर को श्री गुरु गोबिंद सिंह के पुत्रों साहिबजादों बाबा जोरावर सिंह जी और बाबा फतेह सिंह जी की शहादत की स्मृति में वीर बाल दिवस मनाया जाएगा।

वीर बाल दिवस का इतिहास
सिख धर्म के दसवें गुरु श्री गोविंद सिंह के चार बेटे थे, अजीत सिंह, जुझार सिंह, जोरावर सिंह और फतेह सिंह। साल 1699 में गुरु गोविंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की और ये चारों साहिबजादे खालसा का हिस्सा रहे। साल 1705 की बात है, पंजाब में उस समय मुगलों का शासन हुआ करता था। मुगल गुरु गोविंद सिंह को पकड़ने के लिए पूरा जोर लगा रहे थे।

इसी जद्दोजहद में गुरू गोविंद अपने परिवार से बिछड़ गए। उनकी पत्नी माता गुजरी अपने बेटों बाबा जोरावर सिंह, बाबा फतेह सिंह और रसोइए गंगू के साथ किसी गुप्त स्थान पर चली गईं। तब बाबा जोरावर मात्र 7 साल के थे और बाबा फतेह की उम्र 9 साल थी। लालच के चलते रसोइए गंगू ने सरहिंद के नवाब वजीर खां के हाथों उन सभी को पकड़वा दिया। उस समय तक बाबा अजीत सिंह और बाबा जुझार सिंह मुगलों से जंग के दौरान शहीद हो चुके थे।

नवाब वजीर खां ने माता गुजरी और दोनों छोटे साहिबजादों पर बहुत अत्याचार किए और धर्म बदलने के लिए कहा लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया। तब वजीर खान ने दोनों साहिबजादों को दीवार में जिंदा चुनवा दिया। उस दिन 26 दिसंबर की तारीख थी। जब ये बात माता गुजरी को पता चली तो उन्होंने भी अपने प्राण त्याग दिए।

उनकी शहादत का सम्मान करने के लिए भारत सरकार ने साल 2022 में घोषणा की थी कि 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में मनाया जाएगा।


Leave a Reply