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पश्चिम बंगाल में ‘दीदी’ के सामने नहीं चल पाया मोदी-शाह का कमाल

नई दिल्ली : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में अब तक आए रुझानों में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) भारी बहुमत के साथ तीसरी बार सत्ता में वापसी कर ली है। मिली जानकारी के मुताबिक हालांकि, टीएमसी प्रमुख और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी सीट नहीं बचा पाईं। मतगणना अभी भी जारी है। बीजेपी ने दावा किया था कि बीजेपी 200 से ज्यादा सीटें बंगाल में जीतेगी। इस बार पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मोदी की छवि और चुनावों के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह भी राज्य की हवा अपने पक्ष में नहीं कर पाए। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि पीएम मोदी से लेकर केंद्रीय मंत्रियों के चुनाव प्रचार और सत्ताधारी दल में सेंधमारी के बाद भी पार्टी से कहां चूक हो गई। आइए जानतें हैं पांच मुख्य वजह

ध्रुवीकरण में कामयाबी नहीं
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में इस बार ध्रुवीकरण को बड़े मुद्दे के रूप में देखा जा रहा है। दरअसल, भाजपा अपनी हर रैली व सभा में जय श्री राम के नारे पर हुए विवाद को मुद्दा बनाती रही। इस बार तृणमूल भी पीछे नहीं रही। ममता बनर्जी ने पहले सार्वजनिक मंच पर चंडी पाठ किया, फिर अपना गोत्र भी बताया और हरे कृष्ण हरे हरे का नारा दिया। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बंगाल में जमीनी पर राजनीतिक ध्रुवीकरण देखने को मिला है।

भाजपा में कोई सीएम पद का चेहरा न होना
बीजेपी की उम्मीदों पर पानी फिर जाने का एक अहम कारण यह भी है कि किसी भरोसेमंद स्थानीय सीएम चेहरे का न होना।  बंगाल के लोगों के लिए बनर्जी हमेशा से मुख्यमंत्री उम्मीदवार के तौर पर एक ज़्यादा स्वीकार्य चेहरा रही हैं।

दूसरे दलों में ‘सेंधमारी ‘
लोकसभा चुनाव में के बाद भाजपा को प्रदेश के जमीनी और बड़े चेहरे चाहिए थे। इसके चलते भाजपा ने दूसरे दलों में सेंधमारी शुरू की और सत्ताधारी दल के कई बड़े नेताओं को अपने पाले में मिला लिया। इनमें सबसे बड़ा नाम सुवेंदु अधिकारी का माना जाता है जो ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी रहे लगातार दो साल सत्ता में बने रहने के बाद ममता सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी जो लहर चल रही थी, उसे बीजेपी पूरी तरह से भुनाने में नाकामयाब रही।

 अपनों नेताओं को किया नाराज
इस बार विधानसभा चुनाव में भाजपा ने दूसरे दलों के नेताओं को पार्टी शामिल कराया।  इसके साथ ही उन्हें बड़े पैमाने पर टिकट भी दिया। जिसके चलते पार्टी के कई नेताओं ने नाराजगी भी जताई।

महिलाओं का नहीं मिला साथ
इस बार भाजपा को उनके साइलेंट वोटर यानी मौन वोटरों का साथ नहीं मिल पाया। बिहार चुनाव विधानसभा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की महिलाओं को बीजेपी का साइलेंट मतदाता बताया था। हालांकि, बंगाल में पार्टी के इस वोटबैंक ने उनका साथ नहीं दिया।  

 

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